मंगलवार, 30 अगस्त 2011

क्यों रखू मै अब अपनी कलम में स्याही ...
जब कोई अरमान दिल में मचलता ही नहीं ..
न जाने क्यों सभी शक करते है मुझपे ..
जब कोई सुखा फुल मेरी किताब में मिलता ही नहीं..
कशीश तो बहुत थी मेरे प्यार में मगर ..
क्या करू किस्मत से ज्यादा किसी को मिलता ही नहीं ..
अगर खुदा मिले तो उससे अपना प्यार मांग लू..
पर सुना है वह मरने से पहले किसी से मिलते ही नहीं.............

2 टिप्‍पणियां:

  1. अगर खुदा मिले तो उससे अपना प्यार मांग लू..
    पर सुना है वह मरने से पहले किसी से मिलते ही नहीं.............
    लाजवाब ........

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  2. अगर खुदा मिले तो उससे अपना प्यार मांग लू..
    पर सुना है वह मरने से पहले किसी से मिलते ही नहीं..........

    बहुत खूब !

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