बुधवार, 27 जुलाई 2011

भारत रत्न

विगत पिछले कई दिनों से या यो कहे तो पिछले वर्ष से ही समय दर समय समाचार चैनलों और अखबारों में प्रमुखता से प्रकाशित होती रही है की सचिन तेंदुलकर को खेल में भारत रत्न दिया जाय ........इस पर मेरी राय थोड़ी अलग है ये अच्छी बात है की भारत रत्न की केटेगरी में खेल को भी सम्मिलित किया जाना है इसके पक्षधर सभी है लेकिन यदि परिवर्तन किसी एक खिलाडी के नाम पर किया जाना है तो यह उचित प्रतीत नहीं होता देश में कई खिलाडी हुए है जिन्होंने अपनी खेल प्रतिभा के दम पर भारत का मान बढाया है ऐसे में एक ही नाम हमारे जेहन में क्यों आ रहा है जबकि क्रिकेट तो चंद देशो या यो कहे ब्रिटेन के अधीनस्थ देशो के मध्य खेले जाने वाला खेल है हाकी के जादूगर मेजर ध्यान चाँद,फ़्लाइंग सिक्ख मिल्खा सिंह,रुस्तमे हिंद दारा सिंह,प्रकाश पादुकोण स्वर्ण पारी PT USHA , कपिल देव जो कही न कही ऐसे सितारे है जिन्होंने उन दिनों खेल जगत में भारत का नाम उचा किया जब संचार माध्यम इतने विकसित नहीं हुए थे जिससे इनकी प्रतिभा को लोग घर बैठे देख सके ! क्रिकेट आज हिन्दुस्तानियों के लिए जूनून की हद तक खेले जाना वाला खेल है लेकिन अफशोस होता है इस खेल में जब 11 खिलाडी खेलते है लेकिन महिमा गान सिर्फ और सिर्फ एक ही खिलाडी का होता है अभी हाल ही में भारत इंग्लेंड टेस्ट मेच हुआ जिसमे भारत की शर्मनाक हर हुई मेच देखकर ये लगा की ये क्या हो रहा है महेंदर सिंह धोनी विकेट कीपिंग छोड़कर बालिंग करने लगे और हद तब हो गयी जब हम जीतने के लिए नहीं बल्कि इस उम्मीद से खेलने उतरे की सचिन तेंदुलकर अपने शतको की सेंचुरी कब पूरी करेंगे और वही हुआ जिसका डर था इंग्लेंड ने भारत की इस कमजोरी को भाप कर उसे शर्मनाक मात दी हम जीतने के लिए खेलना चाहिए था न की किसी खिलाडी के रिकार्ड को दुरुस्त करने के लिए इस टेस्ट मेच में सचिन तेंदुलकर को फीवर (बुखार )था वे बुखार से पीड़ित थे फिर भी खेलने उतरे क्या उनका ये निर्णय सही था जब कोई खिलाडी घायल हो चोटग्रस्त हो या किसी बीमारी (बुखार ) से पीड़ित हो ऐसे में वह चयनकर्ताओ अपने कोच या टीम के कप्तान को बगैर बताये वह मैदान में सिर्फ अपने सपनो को पूरा करने उतरता है तो वह अपना ही नहीं पुरे देश व उससे जुडी भावनाओ को चोट पहुचता है बुखार से पीड़ित सचिन जब बेटिंग करने उतरे तो पहली पारी में 34 व दूसरी पारी में सिर्फ 12 रन ही बना पाए यदि उनकी जगह कोई और बैट्समेन आता तो हो सकता है की उससे ज्यादा रन बनता या ये कहे की इस हर को टाला जा सकता था सचिन जी आप बेहतरीन खिलाडी है आप जैसा कोई नहीं लेकिन जब आप इतनी प्रसिद्धि मान सम्मान पा चुके हो तो ये चिंता भी आप करे की कही आपका निर्णय क्रिकेट की जीत में बाधक तो नहीं बन रहा ..........

7 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल सही लिखा है जी. ऐसा नहीं होना चाहिए.

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  2. मेथ्यु हेडन ने एक बार कहा था कि ओस्ट्रेलिया के किरकेटर जब ९०+
    रन बना लेते हैं तब भी अपना स्वावभिक खेल खेलते हैं,जो सच है।
    हमारे एक आध खिलाडी को छोड़ कर बाकि ९० से १०० तक आने में कितना टाइम लेते हैं,सब को पता है।यह टीम से ज्यादा निजी रिकॉर्ड के लिए लगाव दर्शाता है।अच्छा लेख शुभकामनाएँ।

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