बुधवार, 26 जनवरी 2011

क्या श्रीनगर में तिरंगा राष्ट्र का अहित कर सकता है !

श्रीनगर में तिरंगा न फहराया जाय इसकी पूरी संजीदगी से सलाह देने वाले यह भूल जाते है की इसी 19 जनवरी को श्रीनगर तथा शेष घाटी से हिन्दुओ को निकाले जाने का बाईसवा साल शुरू हुआ है क्या किसी भी राष्ट्रवादी-अराष्ट्रवादी या पर-राष्ट्रवादी अख़बार में इसकी चर्चा हुई!क्या कही कोई एक सम्पादकीय इस वेदना पर लिखा गया की आखिर क्या वजह है की पांच लाख हिन्दू 22 साल पहले अपने घरो से उजाड़ कर बहार फेक दिए गए थे!उनके सात सौ से ज्यादा ऐसे मंदिर है,जिनके छाया चित्र और विडिओ उपलब्ध है,जिन मंदिरों को तोडा गया,अपवित्र किया गया,मुर्तिया खंडित की गयी सात सौ हिन्दू मंदिरों के तोड़े जाने और पांच लाख हिन्दुओ के बलात्कार,हत्या,अनाचार के बाद हुए निष्क्रमण को हिन्दुओ का सामान्य भाग्य मानकर सहज और स्वाभाविक घटनाक्रम मान लिया गया!इसी तरह जिस तरह श्रीनगर में तिरंगे का सहज रूप में न लहराया जाना एक स्वीकार्य बात है जिसकी चर्चा भी निषिद्ध है जब तक की कोई सिरफिरे तिरंगा लहराने की बात न करने लगे!अब सोचिये इस बात का उन सैनिको पर क्या असर होगा जिन्हें तिरंगे की शपथ दिलाकर घाटी में तिरंगे की रक्षा के लिए भेजा जाता है और जब वे देशद्रोहियों का सामना करते हुए शहीद हो जाते है तो उनकी देह तिरंगे में लपेटकर उनके घर भेजी जाती है!सीमा सुरक्षा बल,सी.आर.पी.एफ.,भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और इसमें फिर जम्मू-कश्मीर पुलिस भी क्यों न जोड़ी जाय,वे "तिरंगा मत फहराओ" सन्देश के सामने क्या सोचेंगे!95 प्रतिशत जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान मुस्लिम है.वे पत्थरबाजो का मुकाबला करते है तिरंगा लहराते है राष्ट्रगान गाते है उनके घरो में गिलानी के गुंडे हमला करते है अब इन अर्ध सैनिक बालो तथा पुलिस के जवानो से कहा जा रहा की श्रीनगर में जो "तिरंगा अभियान"के तहत राष्ट्रध्वज फहराने आ रहे है उन्हें तिरंगा मत फहराने देना श्रीनगर में तिरंगा फहराने की भा.ज.यु.मो.अध्यक्ष अनुराग सिंह ठाकुर ने की घोषणा की तो माहौल यु गरमा गया मानो तिरंगा कश्मीर में नहीं इलामाबाद में फहराने की तैयारी की जा रही हो वहा के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बयान दे दिया की श्रीनगर में तिरंगा फहराने नहीं दिया जायेगा.घाटी में तिरंगा-अभियान के कारण माहौल गरमा गया.तनाव बढ़ने लगा ऐसे समाचार छपे चिंतनशील,तर्कसम्मत सेकुलर ढंग से देश के हित की बात करने वाले गंभीर मुद्रा में बोले,बहुत तकलीफ के बाद घाटी का माहौल कुछ नियंत्रित हुआ है,अमन की और हम बढ़ रहे है ये तिरंगा फहराने की बात करके माहौल ख़राब किया जा रहा है.राष्ट्रिय हित का तकाजा है की श्रीनगर में तिरंगा न फहराया जाय यानी श्रीनगर में तिरंगा फहराना राष्ट्र का अहित कर सकता है ये तिरंगा है ही ऐसी चीज इसे देखकर अंग्रेजो को लगता था की उनका अहित होगा पाकिस्तानियों को तिरंगे से चिढ है इस तिरंगे से तालिबानी चिढ़ते है और माओवादी नक्सली भी हर देशद्रोही और भारत का शत्रु तिरंगे से चिढ़ता है तथा हर देशभक्त दुनिया के किसी भी कोने में तिरंगे को देखकर सम्मान से उसे प्रणाम करता है तिरंगे में हमारे प्राण है हम तिरंगे के लिए प्राण देने में भी संकोच नहीं करते हर जय विजय के क्षण हम तिरंगे के साथ मनाते है जो तिरंगे का नहीं वह हमारा नहीं हो सकता और उसकी भावना या सवेंदना की हमें परवाह भी नहीं करनी चाहिए यदि उमर अब्द्दुल्ला विवेक से काम लेते तो तुरंत बयान देते की हम युवा मोर्चा अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और उनके साथियों को श्रीनगर में तिरंगा फहराने के लिए आमंत्रित करते है वे हमारे साथ आए और राज्य के देशभक्त नागरिको के साथ तिरंगा लहराए लाल चौक और बाकी जगहों पर भी तब देखिये क्या बात बनती लेकिन तिरंगे का विरोध कर उमर अब्दुल्ला ने देशभक्तों को ठेस पहुचाई है संगीनों के साए तले वे स्वयं श्रीनगर के खाली स्टेडियम में तिरंगा तो लहरायेंगे ही संवेधानिक मज़बूरी है और पद पर बने रहने की शर्त भी पर वह लहराना भी कोई लहराना कहा जायेगा !डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसी तिरंगे को श्रीनगर में शान से लहराए जाने की स्थिति हेतु जान दी थी उनकी मृत्यु की जिसे तब संघ-जनसंघ के नेताओ ने हत्या कहा था किसी भी ने जांच नहीं की डॉ.मुखर्जी की माता जोगमाया देवी ने कहा था की एक साधारण नागरिक की संदिग्ध मृत्यु की भी जांच होती है पर मेरा बेटा तो देश का नेता था उसकी रहस्यमय मृत्यु की मजिस्ट्रेट जांच तक नहीं करवाई गयी जोगमाया देवी द्वारा प.नेहरु को लिखे पत्र सिर्फ एक माँ की वेदना नहीं एक आहत देशभक्त नागरिक के करुण क्रंदन को अभिव्यक्त करते है उस समय शेख अब्दुल्ला कश्मीर के वजीरे आजम यानी प्रधानमंत्री थे और प.नेहरु देश के प्रधानमंत्री उन्ही शेख अब्दुल्ला के पोते उमर अब्दुल्ला को आज वजीरे आजम इसलिए नहीं कहा जाता क्योकि डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शेख अब्दुल्ला की जेल में 23 जून 1953 को हुई मृत्यु ने देश को हिला दिया था और एक लज्जित नेहरु सरकार तथा उसके बाद के शासको को कश्मीर में भारतीय प्रभुसत्ता को चरणबद्ध से लागू करना पड़ा लेकिन फिर भी तिरंगे की प्रभुसत्ता जम्मू व लद्धाख पर पूरी है लेकिन घाटी के देशद्रोही तत्व उसके विरुद्ध आज भी आवाज उठाने में संकोच करते श्रीनगर बार एसोसिअसन के अध्यक्ष ने सार्वजनिक बयान दिया की वे भारतीय नहीं है उसे जड़ सहित अपने आकाओ की जमीं पर उठा फेकने के बजाय एक कमजोर सरकार उसे सहन करती रही उसका बयान श्रीनगर के अखबारों के पहले पन्ने पर छपा फिर उस बयान की तारीफ़ में बयान छपे कोई कार्यवाही नहीं की गयी यह वही श्रीनगर है जंहा के विद्धालयो की पुस्तक में राष्ट्रगान नहीं छपता जंहा बच्चो को गणतंत्र दिवस या स्वत्न्रता दिवस का महत्व नहीं समझाया जाता जंहा तिरंगे को हाँथ में शान की बात नहीं मानी जाती जंहा कुछ मुट्ठीभर देशद्रोही वोट बेंक राजनीती के साए तले देशभक्त मुस्लिमो को भी खामोस बनाये हुए है इसलिए जब लाल चौक पर पाकिस्तानी झंडा फहराया जाता है तो वह खबर नहीं बनती उन लोगो द्वारा अपने प्रभाव के क्षेत्र में पाकिस्तानी झंडा फहराया जाना बहुत स्वभाविक एवं सहज माना जाता है उतना ही स्वभाविक जितना भारत के वीर सैनिको का अपमान और उन पर पत्थर फेंका जाना माना जाता है ये लीग गिलानी और अरुंधती राय के कबीले वाले है जंहा का नमक खायेंगे उसी के साथ विश्वासघात करेंगे देशभक्तों का और उनकी देशभक्ति का इससे बढ़कर और क्या अपमान हो सकता है ..........                                                                                            (आभार श्री तरुण विजय )

12 टिप्‍पणियां:

  1. अमरजीत जी ! आपका यह लेख सामयिक है सुन्दर प्रस्तुती |कल आपकी यह प्रस्तुति चर्चामंच में होगी | देखना णा भूलिएगा और अपने विचार भी जरूर दीजियेगा ...http://charchamanch.uchcharan.com
    और मेरे अमृतरस ब्लॉग में भी आईएगा http://amritras.blogspot.com

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  2. एक एक शब्द से सहमत हूँ..... बहुत सटीक और सामयिक आलेख ...
    आलेख की आखिरी पंक्ति सब कुछ कह रही है.... 'जहाँ का नमक.....

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  3. तिंरगा लहराना हमारी देशभक्ति का बोध है
    तिंरंगा फहराना बना आज क्यों अपराध है

    सही चित्रण किया है आपने....राजनीति कितना गिर सकती है यह आभास हुआ...

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  4. अमरजीत जी ! आपका यह लेख सामयिक है सुन्दर प्रस्तुती तिंरगा लहराना हमारी देशभक्ति का बोध है.कभी समय मिले तो हमारे ब्लॉग//shiva12877.blogspot.com पर भी अपने एक नज़र डालें

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  5. प्रिय बंधुवर अमरजीत सिंह जी

    आपकी इस पोस्ट के लिए हार्दिक आभार !
    एक एक शब्द से सहमति है … विकट स्थिति बनादी है दोगले राजनीतिज्ञों ने … धिक्कार है उन्हें !
    क्यों वीरों ने दी क़ुर्बानी ?
    वफ़ा शहादत बनी कहानी !
    क़र्ज़ शहीदों का भूले ,
    उन कृतघ्नों को चुल्लू पानी !


    फिर भी क्या करें…गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  6. डॉ.नूतन जी आपका धन्यवाद ! मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है की पहली बार मेरी रचना चर्चा मंच के लिए चुनी गयी ! पुन:आपका आभार
    डॉ. मोनिका जी ये सत्य है परन्तु हमारे राजनेताओ ने आँखों पर राजनीती का चश्मा लगा रखा है इन्हें तो वोट बैंक से मतलब है भले ही इनकी नीतियों से देशद्रोहियों व अलगाववादियों की बढ़ावा मिलता हो!
    प्रतिबिम्ब जी तिरंगा फहराना अपराध है वन्दे मातरम कहना अपराध है
    शिवा जी धन्यवाद
    राजेन्द्र जी धन्यवाद आपने इस रचना के समर्थन में जिन लाइनों को लिखा है वह उत्कृष्ट है

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  7. sharm ki baat hai ki jis tirange ko hum apni aan maante hai usi ko apne desh ke ek hisse men is tarah asparshiye bana diya gaya hai.iska matlab kya ye nikala jaye ki hamari sarkaar kahi na kahi ye maan chuki hai ki kashmir ab hamara hissa nahi raha. yaar khul kar saamne aao aur kah do ya to ye ki kashmir hamara hai,yaa hum napunsak hai.ye natak ab band hona chahiye.jawan seema par marte hain to mare apni bala se, hamari desh ki sarkaar ko apni gandi politics se phursat hi nahi,kya karen...

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  8. Sahmat hun ..Har Hindustaani ko desh men har jagah jhanda fahraane ka adhikaar hai......is adhikaar ki raksha har keemat par honi chaahiye..........

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  9. लेख बहुत अच्छा है। विचारणीय है।

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  10. आपने सही कहा ‘हमारे राजनेताओ ने आँखों पर राजनीती का चश्मा लगा रखा है इन्हें तो वोट बैंक से मतलब है भले ही इनकी नीतियों से देशद्रोहियों व अलगाववादियों की बढ़ावा मिलता हो!’

    कश्मीर को देश से अलग विशेषाधिकार दे कर वर्षों पहले यह चिनगारी सुलगाई जा चुकी है।

    आपका लेख बहुत अच्छा ... विचारणीय है। ऐसे विचारोत्तेजक आलेख के लिए बधाईयाँ ।

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