गुरुवार, 9 जून 2011

तिहाड़ जेल .........

कोई पुस्तैनी जागीर बन बैठा है दूर संचार के तारो को !
कोई हसी मजाक समझ रहा है सुप्रीम कोर्ट की फटकारो को !!
कोई तेलों का दाम बढाकर रिश्वत खोरी करता है !
कोई पी.एम. के आफिस में ही इसरो की चोरी करता है !!
कोई बाट रहा है मयखानों में सड़ाकर अनाज के दानो को !
कोई कौड़ी के भाव बेच रहा है वीर शहीदों के मकानों को !!
कोई बिरयानी बघार रहा है पामोलिव के तेलों में !
कोई भारत माँ को लुट रहा है राष्ट्रमंडल के खेलो में !!
कोई अफजल कसाब को परोस रहा है चिकन और जमो को !
कोई बर्बरता से कुचल रहा है अन्ना और बाबा के संग्रामो को !!
कोई नौकर से बदतर कर देता है पी.एम.की मर्यादा को !
कोई सत्ता के पहरे देता है नक्सलियों के दादा को !!
अब छोडो धीरज का चोला तोड़ो स्विस बैंक के तालो को !
बिच सड़क में नंगा कर दो इन दिल्ली के चोरो और दलालों को !!
क्या रखा है ए रखा है ए राजा, कनमोझी और कलमाड़ी में !
इनको हाईकमान को डालो तिहाड़ जेल की बाड़ी में !!
ऐसा होगा जिस दिन धरती पर खुद कला धन वापस आ जायेगा !
नहीं जरुरत फिर किसी संघर्ष की, गरीब चैन से दो वक्त की रोटी खायेगा !!....

4 टिप्‍पणियां:

  1. कौन भेजेगा इन्हें जेल ? यही तो हाकिम बने बैठे हैं ...आक्रोश को दिखती अच्छी रचना

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  2. बहुत सार्थक और सटीक आक्रोश...

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