रविवार, 10 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहीम

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रसिद्द समाजसेवी अन्ना हजारे के अनशन से सरकार की मुश्किलें खड़ी हो गयी थी ! जन लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर अनशन कर रहे हजारे को व्यापक जन समर्थन मिला ! दिल्ली के जंतर मंतर से यह आवाज निकल कर पुरे देश में फ़ैल गयी ! देश के विभिन्न राज्यों में धरना,उपवास ,रैली ,मशाल जुलुस ने इस आन्दोलन को जन आन्दोलन का रूप दे दिया ! फेस बुक और ट्विटर में इस विषय पर लोगो ने अपने कमेंट्स देने शुरू कर दिए ! एक प्रकार से होड़ सी लगी रही समर्थन देने वालो की !मोबाईल में आने वाले SMS भी इस अनशन को लेकर ही थे !
सोचनीय विषय यह है की इस आन्दोलन को इतना व्यापक जन समर्थन कैसे मिला ! बहुत हद तक तो राजनेताओ ,भ्रष्ट मंत्रियो ,नौकरशाही में व्याप्त भ्रस्टाचार से पीड़ित जनता की वर्षो से दबी आग ने अन्ना के अनशन से चिंगारी का रूप लिया !स्कूल में एडमिशन से लेकर ,ड्रायविंग लाइसेंस बनाने ,सरकारी कार्यो में अफसरों बाबुओ को रिश्वत देते देते आम जनता त्रस्त हो चुकी थी !इस आक्रोशित विचार को अन्ना के अनशन ने ज्वालामुखी का रूप दिया ! ज्वालामुखी के फटने से जो लावा विरोध स्वरूप बह निकला उसकी चपेट में आज नहीं तो कल राजनेता ,भ्रष्ट मंत्री नौकरशाह चपेट में आयेंगे ! अपने आप में एक तरह से एक नए आन्दोलन की शुरुआत अन्ना हजारे ने की है ! इस आन्दोलन में राजनेताओ को छोड़कर फ़िल्मी हस्तिया , क्रिकेट खिलाडी , वरिष्ठ समाजसेवी सम्मिलित रहे ! राजनेताओ ने भी इस आन्दोलन में अपना समर्थन देने का प्रयाश किया परन्तु आंदोलनरत लोगो ने राजनेताओ को इस आन्दोलन से दूर खदेड़ दिया ! आन्दोलन के कोर ग्रुप में स्वामी अग्निवेश का होना आश्चर्य का विषय है ! घोर नक्सली समर्थक स्वामी अग्निवेश पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ लाल सलाम का नारा लगते दिखे थे ! उनका इस मुहीम में होना आश्चर्य का विषय है ! हर एक आन्दोलन की शुरुआत नेक नियति व जन आन्दोलन को लेकर प्रारम्भ होती है परन्तु कुछ लोगो के आने से इस आन्दोलन का स्वरूप बदल जाता है !वह आन्दोलन अपनी दिशा से भटक कर गलत हाथो में चला जाता है ! नक्सल बाड़ी का जन आन्दोलन चलने वाले कानू सान्याल का आन्दोलन आज कई राज्यों में सिरदर्द बन चूका है ! हथियार थामे नक्सली अब राज्यों की सत्ता को ललकार रहे है , सुरक्षा बलों की निर्मम हत्या कर रहे है , जन अदालत लगाकर तालिबानियों की तर्ज पर सजाए दे रहे है !
अन्ना जी आपके द्वारा चलाई गई मुहीम निश्चित ही इस देश की दशा व दिशा बदलने में सहायक होगी परन्तु अंजाम में पहुचने के लिए हथियारों के बल पर निष्कर्ष निकालने वालो के समर्थको को पहचान कर उन्हें दूर करे क्योकि गाँधी जी के मार्ग पर चलने वाले इस आन्दोलन में हिंसा के मार्ग पर चलने वाले नक्सलियों के समर्थक स्वामी अग्निवेश का क्या काम !
अन्ना जी ने सयुक्त सदस्यीय समिति में जिन्हें सदस्य मनोनीत किया है उन्हें लेकर जो सार्वजानिक मतभेद उभरे है वह स्वभाविक है ! अन्ना जी का आन्दोलन एक जन आन्दोलन था परन्तु 5 सदस्यों का नाम चुनने में जो अलोकतांत्रिक तरीका अपनाया गया वह उचित नहीं था विशेष रूप से अरविन्द केजरीवाल के चयन को लेकर अनशन स्थल पर भारी विरोध के स्वर उठे साथ ही 5 सदस्यों में पिता व पुत्र को एक साथ रखने पर भी भारी विरोध के स्वर उठे ! शांति भूषण और प्रशांत भूषण के एक साथ 5 सदस्यीय समिति में होने का भारी विरोध हुआ ! योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इसका विरोध किया है साथ ही साथ धरना स्थल पर लोगो ने विरोध स्वरूप नारेबाजी भी की अनशन तोड़ने से मना कर दिया ! अन्ना जी जुश पिलाने आये तो उन्हें भी मना कर दिया गया !
अब सोचनीय विषय यह है की मुहीम अच्छी थी वे स्वयम एक अच्छे सुलझे हुए समाजसेवी है ! देश की स्थिति को लेकर उनके आन्दोलन में देश भर के हर उम्र दराज के लोग जुड़ते गये ! ऐसे में स्वामी अग्निवेश जैसे लोगो का होना अरविन्द केजरीवाल सहित परिवार वाद को बढ़ावा देने पिता पुत्र को एक साथ सम्मिलित करना अलोकतांत्रिक तरीके से चयन करना इस आन्दोलन को भविष्य में किस और ले जायेगा चिंतनीय है क्योकि अभी तो शुरुआत है मंजील अभी बहुत दूर है ! बिल , विधेयक अथवा कानून तो इस देश में बहुत से बने है परन्तु उसकी सार्थकता तभी है जब ऐसे विधेयक के मूल उद्देश्यों से जनता को लाभ हो और दोषियों को सजा मिले !

8 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थकता तभी है जब ऐसे विधेयक के मूल उद्देश्यों से जनता को लाभ हो और दोषियों को सजा मिले !

    सही कहा आपने...
    इस सार्थक लेख के लिए आपको हार्दिक बधाई।

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  2. आशा की नई किरण, जो ईजाद करने में हम देर तो कर सकते हैं, चूकते कभी नहीं.

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  3. देर से सही हमने विचार तो किया .....इसी का परिणाम है यह जनसमर्थन .....सार्थक पोस्ट

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  4. नेता जी सुभाषचंद बोस, सरदार भगतसिंह, रामप्रसाद ’बिस्मिल’ आदि ने कभी सोचा न होगा कि जिस आजादी को प्राप्त करने के लिए वे जीवन की कुर्बानी दे रहे हैं। वह भ्रष्टाचार के कारण इतना पतित हो जायगी। भ्रष्टाचार से परहेज़ करने का पाठ सार्वजनिक मंचों से खूब पढ़ाया जाता है परन्तु यथार्थ में क्या स्थिति है वह किसी से छुपी हुई नहीं है।
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    भारत में राजनैतिक सत्ता के गुलगुले जाति-धर्म के गुड़ से बनते हैं। यदि गुड़ खराब होगा तो उससे बना हर पकवान खराब होगा। गुड़ को शोधित किए बिना अच्छे परिणाम की कल्पना करना व्यर्थ है।
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    सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

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  5. बिल , विधेयक अथवा कानून तो इस देश में बहुत से बने है परन्तु उसकी सार्थकता तभी है जब ऐसे विधेयक के मूल उद्देश्यों से जनता को लाभ हो और दोषियों को सजा मिले !
    शत प्रतिशत सत्य ...
    इस सार्थक लेख के लिए आपको हार्दिक बधाई..

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  6. जी सरकार ने तो माँ लिया परन्तु नेतागीरी कि चाकू न चल जाय तब

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  7. यह आन्दोलन फैशन में परिवर्तित होता गया लोग क्रेडिट लेने का लोभ कर गए

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  8. उम्मीद की किरण जगी है .....सफलता किसी न किसी दिन जरूर मिलेगी

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