बुधवार, 15 दिसंबर 2010

सबको खुश करने के चक्कर में,
जाने क्या क्या दर्द सहे,
कहने को तो कह सकते थे,
लेकिन हम खामोश रहे !
ख़ामोशी वो क्या समझेंगे,
जो जलशो के भूखे है ,
आंसू तो पवित्र है सभी के,
होंठ सभी के झूठे है !
इस पर भी ना जाने क्यों,
लोग हमी से रूठे है !!

19 टिप्‍पणियां:

  1. waah amarjeet ji chha gaye...kya likha hai...
    behtareen..
    aur aaj kal kahna wyast hain....mere naye blog par aapke darshna ka intzaar hai....

    उत्तर देंहटाएं
  2. अमरजीत जी,

    शानदार अभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  3. सबको खुश करने के चक्कर में,
    जाने क्या क्या दर्द सहे,
    कहने को तो कह सकते थे,
    लेकिन हम खामोश रहे !

    बहुत कटु सत्य..सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  4. अमरजीत जी, आपकी मासूम अभिव्‍यक्ति दिल में धडकन सी उतर गयी। हार्दिक बधाई।

    ---------
    प्रेत साधने वाले।
    रेसट्रेक मेमोरी रखना चाहेंगे क्‍या?

    उत्तर देंहटाएं
  5. तभी तक रूठे हैं जब तक असलियत समझ नहीं आती। जिस दिन सच्चाई सामने आ जाएगी उस दिन :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह वाऽऽह !
    अमरजीत जी
    बहुत ख़ूब !

    कहने को तो कह सकते थे,
    लेकिन हम ख़ामोश रहे !


    रास्ता तो ग़लत नहीं ख़ामोशी वाला… :)

    लोग हमीं से रूठे हैं ! आपकी रचना पढ़ लें तो रूठे हुए आपसे रूठे रह नहीं सकते …

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    उत्तर देंहटाएं
  7. खामोशी की बात ही कुछ और होती है..................................मौन कुछ न बोलकर भी बहुत कुछ बोलता है।...................
    पर विडम्बना यही है कि आजकल के व्यस्त जीवन में व्यक्ति के पास एक मिनट रुककर, ठिठककर, ठहरकर किसी के मौन को, खामोशी को समझने, जानने एवं उसके विषय में सोचने का समय ही नहीं मिलता.....................................................अन्यथा क्या किसी के वृद्ध माता-पिता के मौन से बड़ा कई मौन होता है?..................नहीं.................................पर कितने ऐसी सन्तानें हैं जो अपने वृद्ध माता-पिता के मौन को समझकर, उनकी व्यथा, पीड़ा को जानकर उसको दूर करने का प्रयास करते हैं।



    उन्हें मौन की भाषा तब समझ में आयेगी, जब वे स्वयं उसी राह से गुजरेंगे।

    उत्तर देंहटाएं
  8. बेहतरीन प्रस्तुति ।
    आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपके ब्लॉग पर पहली बार आई हूँ शायद ....बहुत अच्छा लगा पढ़ना ...

    आंसू तो पवित्र है सभी के,
    होंठ सभी के झूठे है !
    इस पर भी ना जाने क्यों,
    लोग हमी से रूठे है !

    सटीक पंक्तियाँ

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत कटु सत्य..सुन्दर प्रस्तुति|आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  11. शेखर जी धन्यवाद
    सुज्ञ जी आभार
    कैलाश जी शुक्रिया
    जाकिर जी बहुत बहुत धन्यवाद
    गगन शर्मा जी सही कहा आपने
    राजेन्द्र जी धन्यवाद
    ममता जी आपने सही कहा माता पिता के मौन को भी कोई नहीं समझता
    प्रियंका जी आभार
    वंदना जी शुक्रिया
    दिव्या जी धन्यवाद
    हर्मन जी आभार
    संगीता जी स्वागत है आपका
    Patali-The-Village स्वागत है आपका

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर रचना...... समय के आभाव माय देर से पहुच पाई माफ़ी चाहती हूँ...

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर रचना लिखी है.

    इस विधा को उत्तरोत्तर आगे बढाते रहें.

    'स्वदेशी', 'तिरंगा' आदि राजनेतिक और आम लोगों को बरगलाने वाली राजनेताओं की चालबाजियों में समय ख़राब करने के बजाय यदि रचनात्मकता पर ध्यान दिया जाये तो राष्ट्र, समज और मानवता कि लिए आपका योगदान अधिक सराहनीय होगा.

    उत्तर देंहटाएं