बुधवार, 27 जुलाई 2011
मंगलवार, 5 जुलाई 2011
आमिर जी क्या सोच कर आपने यह फिल्म बनाई ??????????
आमिर खान ने क्या सोचकर यह फिल्म बनाई------------
आमिर खान बहुत अच्छे अभिनेता है उन्होंने अपने अभिनय के माध्यम से एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मे दी है ..और अपने अभिनय ही नहीं अपने निर्देशन में ज्वलंत विषयो और दिल को छूने वाली फिल्मो का निर्माण भी किया है ..लगान, तारे जमी पर, रंग दे बसंती आदि लेकिन इसी आमिर खान ने एक और फिल्म का निर्माण किया है देल्ही-बेली *** फिल्म देखकर मन में आया की क्या सोचकर आमिर ने यह फिल्म बनाई मेरे एक मित्र ने कहा की आमिर खान ने अपने इंटरव्यूय में कहा था की मै यह फिल्म वयस्कों के मनोरंजन के लिए बना रहा हु आमिर जी वयस्कों के बारे में और मनोरंजन के बारे क्या आपकी यही राय है गाली गलौज वह भी ऐसी ऐसी गालीया ऐसे ऐसे शब्द जो की सभ्य समाज में असभ्य कहे जाते है जिसे सुनकर ही लोग अनसुना कर देते है उसे सुनने के लिए लोग टिकट खरीद रहे है धन्य है आमिर जी ! आमिर जी वयस्कों के लिए फिल्म ही बनानी थी तो हमारे समाज में बहुत से विषयो पर बोलने सुनने में असहज व संकोच मह्सुश करते है उन पर आप खुलकर फिल्म बनाते तो शायद अच्छा होता फिल्म के बारे में लोगो की अपनी अपनी राय हो सकती है हो सकता है बहुतो को यह फिल्म अच्छी लगी हो लेकिन मैंने जब यह फिल्म देखी तो मन में यह सवाल आया की .........
आमिर जी क्या सोच कर आपने यह फिल्म बनाई ??????????
आमिर खान बहुत अच्छे अभिनेता है उन्होंने अपने अभिनय के माध्यम से एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्मे दी है ..और अपने अभिनय ही नहीं अपने निर्देशन में ज्वलंत विषयो और दिल को छूने वाली फिल्मो का निर्माण भी किया है ..लगान, तारे जमी पर, रंग दे बसंती आदि लेकिन इसी आमिर खान ने एक और फिल्म का निर्माण किया है देल्ही-बेली *** फिल्म देखकर मन में आया की क्या सोचकर आमिर ने यह फिल्म बनाई मेरे एक मित्र ने कहा की आमिर खान ने अपने इंटरव्यूय में कहा था की मै यह फिल्म वयस्कों के मनोरंजन के लिए बना रहा हु आमिर जी वयस्कों के बारे में और मनोरंजन के बारे क्या आपकी यही राय है गाली गलौज वह भी ऐसी ऐसी गालीया ऐसे ऐसे शब्द जो की सभ्य समाज में असभ्य कहे जाते है जिसे सुनकर ही लोग अनसुना कर देते है उसे सुनने के लिए लोग टिकट खरीद रहे है धन्य है आमिर जी ! आमिर जी वयस्कों के लिए फिल्म ही बनानी थी तो हमारे समाज में बहुत से विषयो पर बोलने सुनने में असहज व संकोच मह्सुश करते है उन पर आप खुलकर फिल्म बनाते तो शायद अच्छा होता फिल्म के बारे में लोगो की अपनी अपनी राय हो सकती है हो सकता है बहुतो को यह फिल्म अच्छी लगी हो लेकिन मैंने जब यह फिल्म देखी तो मन में यह सवाल आया की .........
आमिर जी क्या सोच कर आपने यह फिल्म बनाई ??????????
गुरुवार, 9 जून 2011
तिहाड़ जेल .........
कोई पुस्तैनी जागीर बन बैठा है दूर संचार के तारो को !
कोई हसी मजाक समझ रहा है सुप्रीम कोर्ट की फटकारो को !!
कोई तेलों का दाम बढाकर रिश्वत खोरी करता है !
कोई पी.एम. के आफिस में ही इसरो की चोरी करता है !!
कोई बाट रहा है मयखानों में सड़ाकर अनाज के दानो को ! कोई कौड़ी के भाव बेच रहा है वीर शहीदों के मकानों को !!
कोई बिरयानी बघार रहा है पामोलिव के तेलों में !
कोई भारत माँ को लुट रहा है राष्ट्रमंडल के खेलो में !!
कोई अफजल कसाब को परोस रहा है चिकन और जमो को !
कोई बर्बरता से कुचल रहा है अन्ना और बाबा के संग्रामो को !!
कोई नौकर से बदतर कर देता है पी.एम.की मर्यादा को !
कोई सत्ता के पहरे देता है नक्सलियों के दादा को !!
अब छोडो धीरज का चोला तोड़ो स्विस बैंक के तालो को !
बिच सड़क में नंगा कर दो इन दिल्ली के चोरो और दलालों को !!
क्या रखा है ए रखा है ए राजा, कनमोझी और कलमाड़ी में !
इनको हाईकमान को डालो तिहाड़ जेल की बाड़ी में !!
ऐसा होगा जिस दिन धरती पर खुद कला धन वापस आ जायेगा !
नहीं जरुरत फिर किसी संघर्ष की, गरीब चैन से दो वक्त की रोटी खायेगा !!....
कोई हसी मजाक समझ रहा है सुप्रीम कोर्ट की फटकारो को !!
कोई तेलों का दाम बढाकर रिश्वत खोरी करता है !
कोई पी.एम. के आफिस में ही इसरो की चोरी करता है !!
कोई बाट रहा है मयखानों में सड़ाकर अनाज के दानो को !
बुधवार, 25 मई 2011
नक्सल समस्या पर हम कितने गंभीर ...............
नक्सलियों का खुनी तांडव मानवता की सारी सीमाए लांघ चूका है और हम सिवाए लाशें गिनने के और शहीद परिवारों को सांत्वना देने के सिवाए और कुछ नहीं कर रहे है!खुलेआम नक्सली बंद का ऐलान करते है एक दो नहीं सैकड़ो की संख्या में नक्सली आते है ,हमारे जवानो की हत्या करते है ,लाशो के साथ अमानवीय कृत्य करते है और हम बेबस से रह जाते है !कहा है मानवाधिकार संघठन,कहा है उनके चहेते पाखंडी अग्निवेश! क्या केंद्र में बैठी सरकार में थोडा भी राष्ट्र धर्म नहीं है !नक्सली समर्थक विनायक सेन जिस पर राजद्रोह का मामला हाइकोर्ट में अपील हेतु लंबित है निचली अदालत ने विनायक सेन को राजद्रोह का आरोपी पाया है और उसे आजीवन कारावास की सजा दी है ........उसे पुरुस्कृत कर देश के प्रतिष्ठित स्थान पर योजना आयोग के सदस्य के रूप में बैठाया गया है क्या इससे यह प्रतीत नहीं होता की केंद्र सरकार भी नक्सल मुद्दे में राजनैतिक रोटिया सेंक रही है! जब CRPF के जवान एक्शन लेते है और कोई आपरेशन करते है तो उसे बदनाम करने में केंद्र सरकार कोई कसर नहीं छोडती! तुरंत आनन् फानन में प्रतिनिधि मंडल भेजती है ,देशभर के तमाम मिडिया व मानवाधिकारो से जुड़े लोग एक सुर में चिल्ल पौ मचाते है और जब इतनी बड़ी संख्या मे हमारे जवान मारे जाते है तो हमारी मिडिया मुकदर्शक बन रह जाती ! अफशोस आजादी के 60 - 65 वर्ष बाद भी ऐसा लगता है की देश के कई राज्य भले ही विकास में बहुत आगे है परन्तु हमारी मिडिया उन्हें अपने समाचारों की केटेगरी में बहुत पीछे रखती है लगातार हो रही घटनाओ से बेखबर बेशरम मिडिया को तो चिंता है की दाऊद के गुर्गो पर हमला किसने किया या नौटंकी करने भट्टा परसोल गए राहुल गाँधी किसकी मोटर बाइक में बैठकर गए थे! धन्य है भारत का मिडिया ...धन्य है केंद्र सरकार और धन्य है मानवाधिकार संघठन ............
शनिवार, 7 मई 2011
माँ
जरा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाए!दिए से मेरी माँ,मेरे लिए काजल बनती है !!
लबो पर उसके कभी बददुआ नहीं होती!बस एक माँ है जो कभी खफा नहीं होती !!
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है !माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है !!
मैंने रोते हुए पोछे थे किसी दिन आंसू!मुद्दतो माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना !!
अभी जिन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा!मै घर से जब निकलता हु दुआ भी साथ चलती है !!
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है!माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है !!
ऐ अँधेरे देख ले तेरा मुह काला हो गया!माँ ने आँखे खोल दी घर में उजाला हो गया !!
मेरी ख्वाईश है की मै फिर से फ़रिश्ता हो जाऊ!माँ से इस इस तरह लिपट जाऊ की बच्चा हो जाऊ!!
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई!मै घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई!!
मुनव्वर साहब के कुछ चुनिन्दा शेर ..........
शनिवार, 23 अप्रैल 2011
अंग्रेजो से ज्यादा भ्रष्ट नेताओ ने देश को लुटा
भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा
भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले
30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है!
या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है!
यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है!
जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है!
इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है!
अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा,
मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है!
एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़ ,या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है!
भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है.
सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है! हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है!
हाल ही में हुए घोटालों का आप सभी को पता ही है -
CWG घोटाला, 2 G SPECTRAM घोटाला , आदर्श घोटाला S बैंड घोटाला,कामनवेल्थ घोटाला,सड़ा गला खादान्न घोटाला,हाउसिंग लोन घोटाला,पामोलिन घोटाला,IPL घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........
भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले
30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है!
या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है!
या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक फोर लेन रोड बनाया जा सकता है!
ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है !
ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो!यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है!
जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है!
इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है!
अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा,
मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है!
एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़ ,या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है!
भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है.
सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है! हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है!
हाल ही में हुए घोटालों का आप सभी को पता ही है -
CWG घोटाला, 2 G SPECTRAM घोटाला , आदर्श घोटाला S बैंड घोटाला,कामनवेल्थ घोटाला,सड़ा गला खादान्न घोटाला,हाउसिंग लोन घोटाला,पामोलिन घोटाला,IPL घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........
रविवार, 10 अप्रैल 2011
भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहीम
दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रसिद्द समाजसेवी अन्ना हजारे के अनशन से सरकार की मुश्किलें खड़ी हो गयी थी ! जन लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर अनशन कर रहे हजारे को व्यापक जन समर्थन मिला ! दिल्ली के जंतर मंतर से यह आवाज निकल कर पुरे देश में फ़ैल गयी ! देश के विभिन्न राज्यों में धरना,उपवास ,रैली ,मशाल जुलुस ने इस आन्दोलन को जन आन्दोलन का रूप दे दिया ! फेस बुक और ट्विटर में इस विषय पर लोगो ने अपने कमेंट्स देने शुरू कर दिए ! एक प्रकार से होड़ सी लगी रही समर्थन देने वालो की !मोबाईल में आने वाले SMS भी इस अनशन को लेकर ही थे !
सोचनीय विषय यह है की इस आन्दोलन को इतना व्यापक जन समर्थन कैसे मिला ! बहुत हद तक तो राजनेताओ ,भ्रष्ट मंत्रियो ,नौकरशाही में व्याप्त भ्रस्टाचार से पीड़ित जनता की वर्षो से दबी आग ने अन्ना के अनशन से चिंगारी का रूप लिया !स्कूल में एडमिशन से लेकर ,ड्रायविंग लाइसेंस बनाने ,सरकारी कार्यो में अफसरों बाबुओ को रिश्वत देते देते आम जनता त्रस्त हो चुकी थी !इस आक्रोशित विचार को अन्ना के अनशन ने ज्वालामुखी का रूप दिया ! ज्वालामुखी के फटने से जो लावा विरोध स्वरूप बह निकला उसकी चपेट में आज नहीं तो कल राजनेता ,भ्रष्ट मंत्री नौकरशाह चपेट में आयेंगे ! अपने आप में एक तरह से एक नए आन्दोलन की शुरुआत अन्ना हजारे ने की है ! इस आन्दोलन में राजनेताओ को छोड़कर फ़िल्मी हस्तिया , क्रिकेट खिलाडी , वरिष्ठ समाजसेवी सम्मिलित रहे ! राजनेताओ ने भी इस आन्दोलन में अपना समर्थन देने का प्रयाश किया परन्तु आंदोलनरत लोगो ने राजनेताओ को इस आन्दोलन से दूर खदेड़ दिया ! आन्दोलन के कोर ग्रुप में स्वामी अग्निवेश का होना आश्चर्य का विषय है ! घोर नक्सली समर्थक स्वामी अग्निवेश पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के साथ लाल सलाम का नारा लगते दिखे थे ! उनका इस मुहीम में होना आश्चर्य का विषय है ! हर एक आन्दोलन की शुरुआत नेक नियति व जन आन्दोलन को लेकर प्रारम्भ होती है परन्तु कुछ लोगो के आने से इस आन्दोलन का स्वरूप बदल जाता है !वह आन्दोलन अपनी दिशा से भटक कर गलत हाथो में चला जाता है ! नक्सल बाड़ी का जन आन्दोलन चलने वाले कानू सान्याल का आन्दोलन आज कई राज्यों में सिरदर्द बन चूका है ! हथियार थामे नक्सली अब राज्यों की सत्ता को ललकार रहे है , सुरक्षा बलों की निर्मम हत्या कर रहे है , जन अदालत लगाकर तालिबानियों की तर्ज पर सजाए दे रहे है !
अन्ना जी आपके द्वारा चलाई गई मुहीम निश्चित ही इस देश की दशा व दिशा बदलने में सहायक होगी परन्तु अंजाम में पहुचने के लिए हथियारों के बल पर निष्कर्ष निकालने वालो के समर्थको को पहचान कर उन्हें दूर करे क्योकि गाँधी जी के मार्ग पर चलने वाले इस आन्दोलन में हिंसा के मार्ग पर चलने वाले नक्सलियों के समर्थक स्वामी अग्निवेश का क्या काम !
अन्ना जी ने सयुक्त सदस्यीय समिति में जिन्हें सदस्य मनोनीत किया है उन्हें लेकर जो सार्वजानिक मतभेद उभरे है वह स्वभाविक है ! अन्ना जी का आन्दोलन एक जन आन्दोलन था परन्तु 5 सदस्यों का नाम चुनने में जो अलोकतांत्रिक तरीका अपनाया गया वह उचित नहीं था विशेष रूप से अरविन्द केजरीवाल के चयन को लेकर अनशन स्थल पर भारी विरोध के स्वर उठे साथ ही 5 सदस्यों में पिता व पुत्र को एक साथ रखने पर भी भारी विरोध के स्वर उठे ! शांति भूषण और प्रशांत भूषण के एक साथ 5 सदस्यीय समिति में होने का भारी विरोध हुआ ! योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इसका विरोध किया है साथ ही साथ धरना स्थल पर लोगो ने विरोध स्वरूप नारेबाजी भी की अनशन तोड़ने से मना कर दिया ! अन्ना जी जुश पिलाने आये तो उन्हें भी मना कर दिया गया !
अब सोचनीय विषय यह है की मुहीम अच्छी थी वे स्वयम एक अच्छे सुलझे हुए समाजसेवी है ! देश की स्थिति को लेकर उनके आन्दोलन में देश भर के हर उम्र दराज के लोग जुड़ते गये ! ऐसे में स्वामी अग्निवेश जैसे लोगो का होना अरविन्द केजरीवाल सहित परिवार वाद को बढ़ावा देने पिता पुत्र को एक साथ सम्मिलित करना अलोकतांत्रिक तरीके से चयन करना इस आन्दोलन को भविष्य में किस और ले जायेगा चिंतनीय है क्योकि अभी तो शुरुआत है मंजील अभी बहुत दूर है ! बिल , विधेयक अथवा कानून तो इस देश में बहुत से बने है परन्तु उसकी सार्थकता तभी है जब ऐसे विधेयक के मूल उद्देश्यों से जनता को लाभ हो और दोषियों को सजा मिले !
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