मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

अजी सुनते हो ...............

अक्सर ये शब्द हमने अपने घरो में सुना है वे जिनकी शादी हो चुकी है या जो विवाह की दहलीज पर खड़े है ऐसे प्यार भरे लुभावने शब्द मन को गुदगुदाते है! जैसे की अजी सुनते हो,मुन्ने के पापा,जरा सुनियेगा इसी तरह पति का पत्नी के लिए संबोधन अरी ओ भागवान,करमा वालिये ये प्यार की मिठास लिए शब्द पति पत्नी के दैनिक दिनचर्या में हुई थकावट को गायब कर देते है!परन्तु वर्तमान परिवेश में आधुनिकता का समावेश लिए परिवारों में पति पत्निया इन शब्दों को भूलते जा रहे है! अब पति तो पति, पत्निया भी अपने पति को उसके नाम से संबोधित करती है! रिश्ते की बनावट और बुनावट किस पर निर्भर करती है! जाने कितने ही जरुरी गुणों की मौजूदगी का बखान कर दिया जाता है! इस सवाल के जवाब में लेकिन सही मायने में इसके लिए दो ही स्थितिया आवश्यक है! पहली रिश्ता निभाने का विचार और दूसरी संवाद निभाने वाली सोच हर नाते का पहला कदम है! अब शादी को लीजिये कैसे बुना जाय यह रिश्ता की ताने बाने बराबर टिके रहे! जिनकी शादी को 20 - 25 साल हो गये ऐसे लोगो से बातचीत करके विवाह काउंसलर इस नतीजे पर पहुचे है की विश्वास ही वह जादू है जो रिश्तो को बंधे रखता है! यह विश्वास ही है जो निभाने वाली सोच का आधार बनता है! लोग कहते मिलेंगे की बात तो समर्पण की है! समर्पण का यह अभिप्राय कदापि नहीं है की हम अपने आपको किसी को समर्पित कर दे! हम आपको बता दे की निभाने के विचार का ही दूसरा नाम समर्पण है जो विश्वास से जुड़ा है!दूसरी बात थी संवाद, संवाद की अहमियत इतनी ज्यादा होती है की इसे समझना बहुत ही आवश्यक है! खास कर सफल वैवाहिक जीवन के लिए, लेकिन यहाँ यह बताना जरुरी होगा की हम बातचीत करने की बात नहीं कर रहे! बातचीत और संवाद में बहुत अंतर है बच्चे के स्कूल की बाते,आर्थिक चर्चा,नौकरी या नौकरों के नखरे,मित्रो रिश्तेदारों की बाते,आफिस या कार्यक्षेत्र की सफलता या कठिनाइयों का अदान प्रदान सचमुच केवल बाते है, संवाद नहीं! बात करना एक तरफ़ा है और संवाद दो तरफ़ा! संवाद सुनने के लिए प्रेरित करता है जब आप सुनते है तब दुसरे को जानते है! ध्यान से सुनने के लिए अपने काम छोड़ देते है, पुरे गौर से सुनकर प्रतिक्रिया देते है, तो सामने वाले का सम्मान करते है! उसकी राय उसके सपनो उसकी सोच को स्वीकारते है! और जब ऐसा होता है तो साथी को जीवन में शामिल किये जाने का यकीन रहता है! संवाद के लिए संही माहौल आज के शोर में पाना यु भी मुश्किल है! कभी कभी अचानक साथ घुमने चले जाने का प्रोग्राम तथा रोज एक साथ भोजन करने के आलावा तीन तरीके है जो आधुनिक समय में संवाद के रास्ते को साफ़ बनाये रखते  है !
1 पति पत्नी घर में खुद को मिडिया स्रोतों से दूर रखे कम से कम कुछ देर के लिए! इसका मतलब है की टी.वी.,कंप्यूटर,मोबाईल म्यूजिक सिस्टम सब से दूर रखे! कोशिश करे की इस माहौल में रोज आधा घंटा बिताये कुछ ही दिनों में आपसी संवाद कितना बेहतर हो जायेगा आप खुद ही देख लीजियेगा !
2 एक साँझा डायरी बनाये जिसमे शुरुआत में अपने अगले दिन के कार्यक्रम के बारे में लिखे! इसमें कोई गलतफहमी नहीं रहेगी धीरे धीरे इसमें अपने सपनो, साथी के लिए भावी योजनाये और मनोभाव भी लिखे जा सकते है! इसमें हर रोज लिखना ही है यह नियम दोनों निभाए! कई लोग कहने से ज्यादा लिखा बेहतर समझते है ऐसे में यह डायरी बहुत ज्यादा फायदेमंद होगी !
3 रात सोने से पहले साथ मिलकर प्रार्थना या दुआ करे! जब दुआए साझी होती है तो जिन्दगिया अलग नहीं हो सकती और जिससे आप नाराज होंगे उसके साथ प्रार्थना नहीं कर सकेंगे! लिहाजा प्रार्थना करते ही गुस्सा छू मंतर हो जायेगा !

बुधवार, 26 जनवरी 2011

क्या श्रीनगर में तिरंगा राष्ट्र का अहित कर सकता है !

श्रीनगर में तिरंगा न फहराया जाय इसकी पूरी संजीदगी से सलाह देने वाले यह भूल जाते है की इसी 19 जनवरी को श्रीनगर तथा शेष घाटी से हिन्दुओ को निकाले जाने का बाईसवा साल शुरू हुआ है क्या किसी भी राष्ट्रवादी-अराष्ट्रवादी या पर-राष्ट्रवादी अख़बार में इसकी चर्चा हुई!क्या कही कोई एक सम्पादकीय इस वेदना पर लिखा गया की आखिर क्या वजह है की पांच लाख हिन्दू 22 साल पहले अपने घरो से उजाड़ कर बहार फेक दिए गए थे!उनके सात सौ से ज्यादा ऐसे मंदिर है,जिनके छाया चित्र और विडिओ उपलब्ध है,जिन मंदिरों को तोडा गया,अपवित्र किया गया,मुर्तिया खंडित की गयी सात सौ हिन्दू मंदिरों के तोड़े जाने और पांच लाख हिन्दुओ के बलात्कार,हत्या,अनाचार के बाद हुए निष्क्रमण को हिन्दुओ का सामान्य भाग्य मानकर सहज और स्वाभाविक घटनाक्रम मान लिया गया!इसी तरह जिस तरह श्रीनगर में तिरंगे का सहज रूप में न लहराया जाना एक स्वीकार्य बात है जिसकी चर्चा भी निषिद्ध है जब तक की कोई सिरफिरे तिरंगा लहराने की बात न करने लगे!अब सोचिये इस बात का उन सैनिको पर क्या असर होगा जिन्हें तिरंगे की शपथ दिलाकर घाटी में तिरंगे की रक्षा के लिए भेजा जाता है और जब वे देशद्रोहियों का सामना करते हुए शहीद हो जाते है तो उनकी देह तिरंगे में लपेटकर उनके घर भेजी जाती है!सीमा सुरक्षा बल,सी.आर.पी.एफ.,भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और इसमें फिर जम्मू-कश्मीर पुलिस भी क्यों न जोड़ी जाय,वे "तिरंगा मत फहराओ" सन्देश के सामने क्या सोचेंगे!95 प्रतिशत जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान मुस्लिम है.वे पत्थरबाजो का मुकाबला करते है तिरंगा लहराते है राष्ट्रगान गाते है उनके घरो में गिलानी के गुंडे हमला करते है अब इन अर्ध सैनिक बालो तथा पुलिस के जवानो से कहा जा रहा की श्रीनगर में जो "तिरंगा अभियान"के तहत राष्ट्रध्वज फहराने आ रहे है उन्हें तिरंगा मत फहराने देना श्रीनगर में तिरंगा फहराने की भा.ज.यु.मो.अध्यक्ष अनुराग सिंह ठाकुर ने की घोषणा की तो माहौल यु गरमा गया मानो तिरंगा कश्मीर में नहीं इलामाबाद में फहराने की तैयारी की जा रही हो वहा के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बयान दे दिया की श्रीनगर में तिरंगा फहराने नहीं दिया जायेगा.घाटी में तिरंगा-अभियान के कारण माहौल गरमा गया.तनाव बढ़ने लगा ऐसे समाचार छपे चिंतनशील,तर्कसम्मत सेकुलर ढंग से देश के हित की बात करने वाले गंभीर मुद्रा में बोले,बहुत तकलीफ के बाद घाटी का माहौल कुछ नियंत्रित हुआ है,अमन की और हम बढ़ रहे है ये तिरंगा फहराने की बात करके माहौल ख़राब किया जा रहा है.राष्ट्रिय हित का तकाजा है की श्रीनगर में तिरंगा न फहराया जाय यानी श्रीनगर में तिरंगा फहराना राष्ट्र का अहित कर सकता है ये तिरंगा है ही ऐसी चीज इसे देखकर अंग्रेजो को लगता था की उनका अहित होगा पाकिस्तानियों को तिरंगे से चिढ है इस तिरंगे से तालिबानी चिढ़ते है और माओवादी नक्सली भी हर देशद्रोही और भारत का शत्रु तिरंगे से चिढ़ता है तथा हर देशभक्त दुनिया के किसी भी कोने में तिरंगे को देखकर सम्मान से उसे प्रणाम करता है तिरंगे में हमारे प्राण है हम तिरंगे के लिए प्राण देने में भी संकोच नहीं करते हर जय विजय के क्षण हम तिरंगे के साथ मनाते है जो तिरंगे का नहीं वह हमारा नहीं हो सकता और उसकी भावना या सवेंदना की हमें परवाह भी नहीं करनी चाहिए यदि उमर अब्द्दुल्ला विवेक से काम लेते तो तुरंत बयान देते की हम युवा मोर्चा अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और उनके साथियों को श्रीनगर में तिरंगा फहराने के लिए आमंत्रित करते है वे हमारे साथ आए और राज्य के देशभक्त नागरिको के साथ तिरंगा लहराए लाल चौक और बाकी जगहों पर भी तब देखिये क्या बात बनती लेकिन तिरंगे का विरोध कर उमर अब्दुल्ला ने देशभक्तों को ठेस पहुचाई है संगीनों के साए तले वे स्वयं श्रीनगर के खाली स्टेडियम में तिरंगा तो लहरायेंगे ही संवेधानिक मज़बूरी है और पद पर बने रहने की शर्त भी पर वह लहराना भी कोई लहराना कहा जायेगा !डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसी तिरंगे को श्रीनगर में शान से लहराए जाने की स्थिति हेतु जान दी थी उनकी मृत्यु की जिसे तब संघ-जनसंघ के नेताओ ने हत्या कहा था किसी भी ने जांच नहीं की डॉ.मुखर्जी की माता जोगमाया देवी ने कहा था की एक साधारण नागरिक की संदिग्ध मृत्यु की भी जांच होती है पर मेरा बेटा तो देश का नेता था उसकी रहस्यमय मृत्यु की मजिस्ट्रेट जांच तक नहीं करवाई गयी जोगमाया देवी द्वारा प.नेहरु को लिखे पत्र सिर्फ एक माँ की वेदना नहीं एक आहत देशभक्त नागरिक के करुण क्रंदन को अभिव्यक्त करते है उस समय शेख अब्दुल्ला कश्मीर के वजीरे आजम यानी प्रधानमंत्री थे और प.नेहरु देश के प्रधानमंत्री उन्ही शेख अब्दुल्ला के पोते उमर अब्दुल्ला को आज वजीरे आजम इसलिए नहीं कहा जाता क्योकि डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की शेख अब्दुल्ला की जेल में 23 जून 1953 को हुई मृत्यु ने देश को हिला दिया था और एक लज्जित नेहरु सरकार तथा उसके बाद के शासको को कश्मीर में भारतीय प्रभुसत्ता को चरणबद्ध से लागू करना पड़ा लेकिन फिर भी तिरंगे की प्रभुसत्ता जम्मू व लद्धाख पर पूरी है लेकिन घाटी के देशद्रोही तत्व उसके विरुद्ध आज भी आवाज उठाने में संकोच करते श्रीनगर बार एसोसिअसन के अध्यक्ष ने सार्वजनिक बयान दिया की वे भारतीय नहीं है उसे जड़ सहित अपने आकाओ की जमीं पर उठा फेकने के बजाय एक कमजोर सरकार उसे सहन करती रही उसका बयान श्रीनगर के अखबारों के पहले पन्ने पर छपा फिर उस बयान की तारीफ़ में बयान छपे कोई कार्यवाही नहीं की गयी यह वही श्रीनगर है जंहा के विद्धालयो की पुस्तक में राष्ट्रगान नहीं छपता जंहा बच्चो को गणतंत्र दिवस या स्वत्न्रता दिवस का महत्व नहीं समझाया जाता जंहा तिरंगे को हाँथ में शान की बात नहीं मानी जाती जंहा कुछ मुट्ठीभर देशद्रोही वोट बेंक राजनीती के साए तले देशभक्त मुस्लिमो को भी खामोस बनाये हुए है इसलिए जब लाल चौक पर पाकिस्तानी झंडा फहराया जाता है तो वह खबर नहीं बनती उन लोगो द्वारा अपने प्रभाव के क्षेत्र में पाकिस्तानी झंडा फहराया जाना बहुत स्वभाविक एवं सहज माना जाता है उतना ही स्वभाविक जितना भारत के वीर सैनिको का अपमान और उन पर पत्थर फेंका जाना माना जाता है ये लीग गिलानी और अरुंधती राय के कबीले वाले है जंहा का नमक खायेंगे उसी के साथ विश्वासघात करेंगे देशभक्तों का और उनकी देशभक्ति का इससे बढ़कर और क्या अपमान हो सकता है ..........                                                                                            (आभार श्री तरुण विजय )

बुधवार, 5 जनवरी 2011

स्वदेशी मेला का आयोजन पिछले 7 वर्षो से रायपुर में किया जा रहा है! जिसमे देश भर से लगभग 250 स्टाल स्वदेशी वस्तुओ के विक्रय व प्रदर्शन हेतु एकत्रित होते है!7 दिनों तक चलने वाले मेले में प्रति दिन विविध प्रतियोगिताये ,सांकृतिक कार्यक्रम ,विचार गोष्ठी ,विभिन्न समाजो के कार्यक्रम व सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न होते है! मेले का पूरा चित्रण तो नहीं परन्तु कुछ झलकियों को प्रस्तुत कर रहा हु आशा है! आपको पसंद आएगी...

                       स्वदेशी मेले के आयोजन से पूर्व विधिवत भूमि पूजन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया
 मुख्य अतिथि रायपुर नगर पालिका निगम में सभापति संजय श्रीवास्तव द्वारा कुदाल चलाकर निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया
 स्वदेशी मेले का विधिवत उद्घाटन समारोह छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह,  डॉ.एच.आर.नागेन्द्र कुलपति स्वामी विवेकानंद योग अनुसन्धान संस्थान बेंगलुरु एव हिन्दू विश्वविद्यालय अमेरिका,  रमेश बैस संसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री,  बृजमोहन अग्रवाल लोक निर्माण,स्कूली शिक्षा मंत्री,  किरणमयी नायक महापौर रायपुर, संजय श्रीवास्तव सभापति रायपुर नगर निगम की उपस्तिथि में संपन्न हुआ !

                                                        मुख्य मंत्री रमन सिंह स्वागत भाषण देते हुए
                                        आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिन्ह दे कर सम्मानित किया गया 
 छत्तीसगढ़ शासन में विधि व पंचायत मंत्री रामविचार नेताम, बाल सरक्षण आयोग के अध्यक्ष यशवंत जैन हज कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राज मेले के दुसरे दिन अतिथि के रूप में उपस्थित हुए
                                 युवा आयोग के अध्यक्ष संतोष पाण्डेय मेले में अतिथि के रूप में उपस्थित हुए
                       छत्तीसगढ़ शासन में उधोग व वाणिज्य मंत्री  दयालदास बघेल अतिथि के रूप में उपस्थित हुए
                                  छत्तीसगढ़ शासन में कृषि मंत्री चन्द्र शेखर साहू अतिथि के रूप में उपस्थित हुए
                            भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सिंह देव सम्भोदित करते हुए
                                    छत्तीसगढ़ विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक सम्भोदित करते हुए
                                              प्रतियोगिताओ की कड़ी में रंगोली प्रतियोगिता संपन्न हुई
                                                                   चित्रकला स्पर्धा संपन्न हुई
                                                                     मेहंदी स्पर्धा संपन्न हुई
                                                                 शिशु वेशभूषा स्पर्धा संपन्न हुई
                                                               सलाद सजाओ स्पर्धा संपन्न हुई
                                             अंतर विद्यालिन महाविद्यालीन समूह नृत्य स्पर्धा संपन्न हुई
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                                                                         व्यंजन स्पर्धा संपन्न हुई
                                 समाज विशेष के आयोजन में छत्तीसगढ़ी समाज द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया
                                              छत्तीसगढ़ी समाज द्वारा व्यंजन का स्टाल भी लगाया गया
                                           सिख समाज द्वारा सिख रेजिमेंट पर नाटक प्रस्तुत किया गया
                                                  सिख समाज द्वारा व्यंजन का स्टाल भी लगाया गया
                                             महार्ष्ट्रीयन समाज द्वारा पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया गया
                                                     केरला समाज द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया
                                                     बंगाली समाज द्वारा कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया
                                       विभिन्न विषयों पर प्रति दिवश विचार गोष्ठी के कार्यक्रम भी संपन्न हुए 
                                                प्रति दिवस सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गए
                                                  नागपुर के H B ग्रुप ने आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किये
                                        इडियन आइडल फेम भाव्या पंडित ने गीतों के माध्यम से समा बंधा
                                                     लाफ्टर चेलेंज फेम राजीव निगम ने खूब हसाया

                                     प्रतियोगिताओ में विजयी प्रतिभाओ को मंच पर सम्मानित किया गया

                                                            स्टाल में विक्रय करते स्टाल धारक
                           मेले में उमड़ी भीड़ प्रति दिवस लगभग 20 से 25 हजार लोगो की उपस्तिथि रहती थी

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

यंहा छुपा कैमरा तो नहीं ......

विज्ञानं के अविष्कार ने इन्सान को बहुत सी चीजे दी है !इन चीजो का उपयोग कर इन्सान ने अपने जीवन को सुखमय बनाया है, परन्तु उनके दुरपयोग ने जिन्दगी में खलल भी डाला है! होटलों में, वाश रूम में, चेंजिंग रूम में और तो और डायग्नोसिस सेंटर में छुपे कैमरों ने ताका झांकी की है! अभी हाल ही में डायग्नोसिस सेंटर में छुपा कर रखे मोबाईल कैमरे को एक युवती ने पकड़ा! सेंटर में काम करने वाले वार्ड ब्वाय ने कैमरा रखा था! इसी तरह एक पापुलर इटिंग आउटलेट के लेडिज वाशरूम में एक महिला ने पाया की वहा कैमरा लगा है !दिल्ली में एक अपैरल स्टोर के चेंजिंग रूम रिकार्डिंग कैमरा पकड़ा गया !पेइंग गेस्ट रखने वाले घर के ओनर ने ही लडकियों के बाथरूम में कैमरा फिट करवा दिया था !शिमला में एक हनीमून कपल की अन्तरंग वीडियो रिकार्डिंग ने उस कपल को आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर कर दिया ! जाहिर है ये घटनाये महिलाओ की प्राइवेशी की धज्जिया उड़ाने वाली है !और इसके नतीजे क्या हो सकते है हम सभी को इस बात का अंदाजा है ........
रहिये सतर्क 
#  बेहतर रहेगा की छोटी दुकानों में ट्राई रूम में जाने के बजाय नामी व विश्वसनीय जगहों पर ही शापिंग करे 
#  बड़े कैमरे को आप थोडा ध्यान से देखने पर पकड़ सकते है 
# पेन कैमरों,बटन कैमरों के आने से सिक्युरिटी वाकई एक बड़ा इशु हो गई है लेकिन थोड़ी सतर्कता से इनसे बचा जा सकता है 
#  अपना मोबाईल उन जगहों पर घुमाये जंहा कैमरे हो सकते है कई बार मोबाईल कैमरे के संपर्क में आकर वाईब्रेट होता है 
#  बहुत बार कैमरा लगा होने पर उस जगह पर मोबाईल सिग्नल नहीं पकड़ता खासकर होटलों में सुरक्षा की दृष्टि से लगाये गए कैमरों के होने पर 
#  अगर वेब कैमरा लगा हो तो ट्राई रूम में दरवाजा बंद करने पर मोबाईल से काल करने में दिक्कत होती है
#  महिलाओ को टेक्नीकल नालेज बढ़ाना चाहिए ताकि वे समझ पाए की किस जगह पर कैमरे छुपे हो सकते है 
#  अगर आपके साथ ऐसी घटना हो तो तुरंत मैनेजर से बात करनी चाहिए फिर मामले में पुलिस की मदद लीजिये 
#  ऐसी सिचुएसन आने पर गुस्सा करने या घबराने के बजाय शांत दिमाग से मैनेजमेंट के साथ मिलकर कोई कदम उठाना चाहिए 
#  चेंजिंग रूम वाशरूम का पूरा मुआयना करने के बाद ही यूज करे 
#  फिटिंग्स की जानकारी पूरी तरह रखे जिससे शापिंग के दौरान ज्यादा कुछ ट्राई कराने की जरुरत ना पड़े 

बुधवार, 15 दिसंबर 2010

सबको खुश करने के चक्कर में,
जाने क्या क्या दर्द सहे,
कहने को तो कह सकते थे,
लेकिन हम खामोश रहे !
ख़ामोशी वो क्या समझेंगे,
जो जलशो के भूखे है ,
आंसू तो पवित्र है सभी के,
होंठ सभी के झूठे है !
इस पर भी ना जाने क्यों,
लोग हमी से रूठे है !!

मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

SMS की दुनिया अजब होती है- होली, दीवाली, दशहरा, रक्षाबंधन, 15 अगस्त, 26 जनवरी, गुरुनानक जयंती, वैशाखी, ईद, क्रिसमस, नए वर्ष जैसे अवसरों पर हम अपने मित्रो रिश्तेदारों से मिलकर अपनी ख़ुशी का इजहार नहीं कर पाते! पहले पहल जब संचार माध्यमो ने इतनी प्रगति नहीं की थी उन दिनों पोस्ट कार्ड अंतर्देशीय या कहे डाक विभाग मुख्य माध्यम था! तब बधाई सन्देश भेजना इतना आसान नहीं था! फिर आया फोन का जमाना हम अपने मित्रो रिश्तेदारों को फोन के माध्यम बधाई सन्देश देने लगे! समय ने और विकाश किया रंगबिरंगे ग्रीटिंग कार्डस, अच्छे कोटेशन SORRY या I MISS YOU जैसे सन्देश बर्थडे व सालगिरह में ऐसे कार्डस खूब चले! वेलेंटाईन डे, फ्रेंडशिप डे पर भी कार्डस की भरी डिमांड रही! संचार माध्यमो की क्रांति ने मोबाईल युग में पहुचाया! जहा हम दुनिया के एक कोने से दुसरे कोने में बैठे व्यक्ति से चलते फिरते कही भी वार्तालाप कर सकते है! त्योहारों या पर्वो के अवसर पर हम अपने करीबियों को SMS कर बधाई देने लगे! SMS की यह परम्परा सिर्फ व सिर्फ त्योहारों पर्वो तक ही सिमित नहीं रही! अक्सर हम अपने मित्रो रिश्तेदारों को सुबह की गुड मार्निंग से लेकर रात की गुडनाईट जैसे संदेशो से याद करने लगे! जोक्स या प्यार भरी कविताये SMS में अक्सर आने लगी परन्तु SMS के शब्द जहा दिल को छूने वाले वही इसका दुरपयोग भी प्रारम्भ हो गया! अश्लील व फूहड़ SMS की बहुतायत होने लगी! कम्पनिया अपने उत्पादों  के प्रचार प्रसार में इसका उपयोग करने लगी !और तो और ऐसे SMS जिसमे उल्लेख होता की साईबाबा या माता का यह SMS 10 लोगो को भेजे आपका भला होगा और यदि नहीं भेजे तो आपका अनर्थ हो जायेगा! जैसे SMS सिरदर्द का सबब बनने लगे! खैर अच्छे या बुरे SMS तो बंद होने से रहे हम तो यहाँ उन SMS का उल्लेख कर रहे है जो दिल को छूने वाले है........
  (1) एक छोटी सी बच्ची अपने पापा के साथ जा रही थी! एक पुल पर पानी बहुत तेजी से बह रहा था! पापा बेटी डरो मत मेरा हाथ पकड़ लो! बच्ची नहीं पापा आप मेरा हाथ पकड़ लो! पापा मुस्कुराते हुए दोनों में क्या अंतर है बेटा! बच्ची अगर मे आपका हाथ पकडू और अचानक कुछ हो जाये तो शायद मै आपका हाथ छोड़ दू! लेकिन अगर आप मेरा हाथ पकड़ेंगे तो मै जानती हु की चाहे कुछ भी हो जाये आप मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे!
(2) अगर आपकी आँखे खुबसूरत है तो आपको दुनिया अच्छी लगेगी ,लेकिन अगर आपकी जुबान खुबसूरत है तो आप दुनिया को अच्छे लगोगे !
(3) 3 दोस्तों की कहानी ज्ञान, धन और विश्वास तीनो बहुत अच्छे दोस्त थे! तीनो में प्यार भी बहुत था! एक ऐसा वक्त आया की तीनो को जुदा होना पड़ा! तीनो ने एक दुसरे से सवाल किया की कौन कहा जायेगा! ज्ञान बोला मै मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा और विद्यालय जाऊंगा! धन ने कहा मै महल और अमीरों के पास जाऊंगा! लेकिन विश्वास चुप था! दोनों दोनों ने वजह पूछी तो विश्वास ने ठंडी आह भर के कहा मै 1 बार चला गया तो फिर नहीं आऊंगा !
(4) कभी किसी को बिलकुल बेकार मत समझना ऐ दोस्तों ये याद रखना की बंद घडी भी 2 बार सही समय बताती है!

SMS की दुनिया ..........................

SMS की दुनिया अजब होती है- होली, दीवाली, दशहरा, रक्षाबंधन, 15 अगस्त, 26 जनवरी, गुरुनानक जयंती, वैशाखी, ईद, क्रिसमस, नए वर्ष जैसे अवसरों पर हम अपने मित्रो रिश्तेदारों से मिलकर अपनी ख़ुशी का इजहार नहीं कर पाते! पहले पहल जब संचार माध्यमो ने इतनी प्रगति नहीं की थी उन दिनों पोस्ट कार्ड अंतर्देशीय या कहे डाक विभाग मुख्य माध्यम था! तब बधाई सन्देश भेजना इतना आसान नहीं था! फिर आया फोन का जमाना हम अपने मित्रो रिश्तेदारों को फोन के माध्यम बधाई सन्देश देने लगे! समय ने और विकाश किया रंगबिरंगे ग्रीटिंग कार्डस, अच्छे कोटेशन SORRY या I MISS YOU जैसे सन्देश बर्थडे व सालगिरह में ऐसे कार्डस खूब चले! वेलेंटाईन डे, फ्रेंडशिप डे पर भी कार्डस की भरी डिमांड रही! संचार माध्यमो की क्रांति ने मोबाईल युग में पहुचाया! जहा हम दुनिया के एक कोने से दुसरे कोने में बैठे व्यक्ति से चलते फिरते कही भी वार्तालाप कर सकते है! त्योहारों या पर्वो के अवसर पर हम अपने करीबियों को SMS कर बधाई देने लगे! SMS की यह परम्परा सिर्फ व सिर्फ त्योहारों पर्वो तक ही सिमित नहीं रही! अक्सर हम अपने मित्रो रिश्तेदारों को सुबह की गुड मार्निंग से लेकर रात की गुडनाईट जैसे संदेशो से याद करने लगे! जोक्स या प्यार भरी कविताये SMS में अक्सर आने लगी परन्तु SMS के शब्द जहा दिल को छूने वाले वही इसका दुरपयोग भी प्रारम्भ हो गया! अश्लील व फूहड़ SMS की बहुतायत होने लगी! कम्पनिया अपने उत्पादों  के प्रचार प्रसार में इसका उपयोग करने लगी !और तो और ऐसे SMS जिसमे उल्लेख होता की साईबाबा या माता का यह SMS 10 लोगो को भेजे आपका भला होगा और यदि नहीं भेजे तो आपका अनर्थ हो जायेगा! जैसे SMS सिरदर्द का सबब बनने लगे! खैर अच्छे या बुरे SMS तो बंद होने से रहे हम तो यहाँ उन SMS का उल्लेख कर रहे है जो दिल को छूने वाले है........
  (1) एक छोटी सी बच्ची अपने पापा के साथ जा रही थी! एक पुल पर पानी बहुत तेजी से बह रहा था! पापा बेटी डरो मत मेरा हाथ पकड़ लो! बच्ची नहीं पापा आप मेरा हाथ पकड़ लो! पापा मुस्कुराते हुए दोनों में क्या अंतर है बेटा! बच्ची अगर मे आपका हाथ पकडू और अचानक कुछ हो जाये तो शायद मै आपका हाथ छोड़ दू! लेकिन अगर आप मेरा हाथ पकड़ेंगे तो मै जानती हु की चाहे कुछ भी हो जाये आप मेरा हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे!
(2) अगर आपकी आँखे खुबसूरत है तो आपको दुनिया अच्छी लगेगी ,लेकिन अगर आपकी जुबान खुबसूरत है तो आप दुनिया को अच्छे लगोगे !
(3) 3 दोस्तों की कहानी ज्ञान, धन और विश्वास तीनो बहुत अच्छे दोस्त थे! तीनो में प्यार भी बहुत था! एक ऐसा वक्त आया की तीनो को जुदा होना पड़ा! तीनो ने एक दुसरे से सवाल किया की कौन कहा जायेगा! ज्ञान बोला मै मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा और विद्यालय जाऊंगा! धन ने कहा मै महल और अमीरों के पास जाऊंगा! लेकिन विश्वास चुप था! दोनों दोनों ने वजह पूछी तो विश्वास ने ठंडी आह भर के कहा मै 1 बार चला गया तो फिर नहीं आऊंगा !
(4) कभी किसी को बिलकुल बेकार मत समझना ऐ दोस्तों ये याद रखना की बंद घडी भी 2 बार सही समय बताती है!